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पटवारी घोटाले को लेकर सियासत में मची हलचल, आखिर कब सुनेगी सरकार पटवारियों की पुकार

पटवारी घोटाले को लेकर सियासत में मची हलचल, आखिर कब सुनेगी सरकार पटवारियों की पुकार। मध्यप्रदेश में भर्ती घोटालों के लिए पहले से बदनाम रहे। व्यापम यानि व्यावसायिक परीक्षा मंडल का नाम बदलकर भले ही कर्मचारी चयन मंडल किया गया हो लेकिन इसके कारनामें आज भी वही हैं। इस बार भी सरकारी भर्ती परीक्षा में घोटाला करके युवाओं के भविष्य और सपनों के साथ खिलवाड़ करने की पुरानी कहानी है और सरकार के गोलमोल से जबाब।

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अब चुनावी साल में कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश में सत्ताधारी BJP और शिवराज सरकार पर एक और भर्ती घोटाले का दावा किया जा रहा है। ताजा मामला पटवारी भर्ती से जुड़ा हुआ है।

सभी टॉपर्स के लिए एग्जाम सेंटर कॉमन चीज थी

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इस पर कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा इस साल की शुरआत में मध्यप्रदेश में ग्रुप 2 सब ग्रुप 4 व पटवारी की भर्ती निकलती है। जिसका पेपर 3 माह बाद मार्च में होता है। जिसमें 14 लाख उम्मीदवार सम्मिलित हुए थे। ये 14 लाख युवा आपको देश में मौजूद बेरोजगारी की गूंज भी सुनाती है। करीब 2 महीने चली परीक्षाओं के बाद सभी अभ्यर्थी सख्ते में थे, क्योंकि पटवारी भर्ती परीक्षा का पेपर इतना कठिन था कि परीक्षा के कुल अंक यानि 200 में से यदि किसी अभ्यर्थी को 135-140 अंक भी मिल जाए तो बड़ी बात होगी। लेकिन 30 जून को भर्ती परीक्षा के नतीजे आने के करीब 10 दिन बाद जब मैरिट लिस्ट जारी की गई तो सभी के होश उठ गए, किसी टॉपर के 183 अंक आए तो किसी ने 177 अंक प्राप्त किए। इन सभी टॉपर्स में एक चीज कॉमन थी एग्जाम सेंटर।

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ग्वालियर के NIR कॉलेज के टॉपर्स

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दरअसल कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने रिट लिस्ट की फोटो जारी करते हुए पूंछा है कि 10 में से 7 टॉपर्स सिर्फ ग्वालियर के NRI कॉलेज से है यह कैसे हो सकता है ? अरुण यादव ने इसे व्यापम-3 घोटाला करार देते हुए क्या कुछ कहा सुनिए। पटवारी परीक्षा पर सवाल उठाते हुए शिवराज सरकार पर लगे आरोप लगाने वाले कांग्रेस नेताओं को करारा जबाब देते हुए गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने क्या कुछ कहा देखिए। ग्वालियर के जिस NRI कॉलेज में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया, वह भिंड से BJP विधायक संजीव कुशवाहा का है। वैसे तो यदि कोई भी अभ्यर्थी परीक्षाओं में टॉप कर सकता है। लेकिन एक ही एग्जाम सेंटर में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के ही नंबर ज्यादा क्यों आ रहे है ? इतना ही नहीं इन सभी 7 टॉपर्स ने अपने हस्ताक्षर तो हिंदी में किए है। लेकिन अंग्रेजी विषय में सभी को 25 में से 25 अंक प्राप्त किए है। वहीँ अगर आमतौर पर देखा जाए तो आजकल के युवा हिंदी से अधिक अंग्रेजी को प्राथमिकता देती है।

घोटाले की खबर सामने आने के बाद से ही पुरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल और इंदौर में फर्जीवाड़े के विरोध में कलेक्टोरेट को घेरकर नारेबाजी कर रहे है।

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